पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ बुनियादी ढांचा
संदर्भ
- वर्ष 2019-20 से 2023-24 की अवधि के लिए रेलवे की यात्री सुविधाओं पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा हाल ही में किए गए ऑडिट में बुनियादी सुविधाओं, पेयजल की गुणवत्ता, यात्री-सुविधा संबंधी कार्यों के क्रियान्वयन तथा निगरानी तंत्र में कई गंभीर कमियाँ पाई गईं।
CAG ऑडिट के प्रमुख निष्कर्ष
- रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2003 में न्यूनतम आवश्यक सुविधाएँ (MEA) शुरू की थीं, जिनके मानकों को वर्ष 2018 में संशोधित किया गया।
- ऑडिट किए गए 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों में से केवल 54 स्टेशनों (11% से भी कम) पर सभी निर्धारित न्यूनतम आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध थीं।
- पेयजल की सुरक्षा: कई स्टेशनों पर वाटर कूलरों से लिए गए जल के नमूनों में ई. कोलाई पाया गया, जो मलजनित संदूषण तथा जल-गुणवत्ता प्रबंधन में अपर्याप्तता का संकेत है।
- दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता: ऑडिट में सार्वभौमिक सुगम्यता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई सुविधाओं में महत्वपूर्ण कमियाँ सामने आईं। मानक रेलिंग युक्त रैंप केवल 44%, निर्धारित पार्किंग स्थल 55% और फिसलन-रोधी मार्ग 32% मामलों में उपलब्ध पाए गए।
- धनराशि का अपर्याप्त उपयोग: लगभग 59% यात्री-सुविधा संबंधी कार्यों में देरी पाई गई। ऑडिट अवधि के दौरान यात्री सुविधाओं के लिए आवंटित धनराशि का 36–44% तक उपयोग नहीं किया गया।
- रखरखाव संबंधी चिंताएँ: CAG ने वाटर कूलरों के रखरखाव, कचरा उठाने, कीट एवं कृंतक नियंत्रण उपायों, स्टेशनों पर नालियों या शौचालयों से सीवेज के निकास तथा शौचालयों, मूत्रालयों और स्नानघरों के रखरखाव में कमियाँ पाईं।
- कमजोर निगरानी: यात्रियों से फीडबैक प्राप्त करने और यात्री सुविधाओं की निगरानी के लिए गठित क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समितियाँ (ZRUCCs) तथा मंडल रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समितियाँ (DRUCCs) निर्धारित आवृत्ति के अनुसार बैठकें नहीं कर रही थीं।
- यात्रियों की शिकायतें: रेलमदद(RailMadad) के माध्यम से दर्ज की गई शिकायतों के विश्लेषण में चिकित्सा सहायता, स्वच्छता, खराब विद्युत उपकरणों तथा जल की उपलब्धता से संबंधित शिकायतों में वृद्धि देखी गई।
- अपनी शिकायतों के समाधान से असंतुष्ट यात्रियों का अनुपात 2022-23 में 37% से बढ़कर 2023-24 में 42% हो गया।
यात्री सुविधाओं में सुधार के लिए सरकारी पहल
- अमृत भारत स्टेशन योजना: यह रेल मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसके अंतर्गत पूरे भारत में 1,340 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास और आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
- स्वच्छ रेल, स्वच्छ भारत कार्यक्रम: इसे वर्ष 2014 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य स्वच्छता मानकों में सुधार करना, पटरियों पर खुले में कचरा एवं अपशिष्ट के निपटान को समाप्त करना तथा यात्रियों में स्वच्छ यात्रा की आदतों को बढ़ावा देना है।
- रेलमदद(RailMadad): यह यात्रियों को रेलवे सेवाओं से संबंधित शिकायतें दर्ज करने और सहायता प्राप्त करने के लिए एक डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराता है।
- शिकायतों में स्वच्छता, जल, विद्युत उपकरण, चिकित्सा सहायता तथा अन्य यात्री सुविधाओं से संबंधित मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
- स्वच्छता अवसंरचना: भारतीय रेलवे ने स्वच्छता संबंधी प्रयासों के अंतर्गत बायो-टॉयलेट तथा बेहतर शौचालय अवसंरचना को बढ़ावा दिया है।
- CAG द्वारा हाल में उठाई गई चिंताओं के बाद रेलवे ने वाटर कूलरों सहित लगभग 20,000 स्थानों पर “टैंक-टू-टैप” जल निस्यंदन प्रणाली स्थापित करने की घोषणा की है।
- यात्री सूचना प्रणाली: रेलवे स्टेशनों को बेहतर इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, डिजिटल डिस्प्ले और संकेतक पट्टिकाओं से सुसज्जित किया जा रहा है।
CAG की सिफारिशें
- CAG ने सिफारिश की है कि रेलवे को यात्री सुविधाओं में पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए स्टेशन-वार और समयबद्ध कार्ययोजनाएँ तैयार कर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
- रेलवे को सभी परामर्शदात्री समितियों और सेवा सुधार समूहों की नियमित बैठकें सुनिश्चित करनी चाहिए तथा कमियों के प्रभावी दस्तावेजीकरण, पर्यवेक्षण और उनके अनुपालन की निगरानी पर ध्यान देना चाहिए।
- रेलवे को यात्री-केंद्रित निगरानी तंत्र को भी सुदृढ़ करना चाहिए। इसके लिए कूड़ा फैलाने के विरुद्ध नियमों के प्रभावी अनुपालन, शिकायत निवारण व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा शिकायत रजिस्टरों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में ठोस सुधार सुनिश्चित हो सके।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
- CAG भारत का सर्वोच्च लेखा-परीक्षण प्राधिकरण है, जो सरकारी खातों का ऑडिट करने तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 तक CAG की नियुक्ति, कर्तव्यों और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यवस्था का संवैधानिक आधार प्रदान किया गया है।
- नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 CAG के सेवा संबंधी प्रावधानों को निर्धारित करता है तथा उसके कार्यालय के कर्तव्यों और शक्तियों का उल्लेख करता है।
CAG के कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व
- भारत की संचित निधितथा विधानमंडल वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की संचित निधि से किए गए व्यय का ऑडिट करना।
- भारत और राज्यों की आकस्मिक निधि तथा लोक लेखा से किए गए व्यय का ऑडिट करना।
- राष्ट्रपति की अनुमति से ऋण, ऋण मोचन निधि , जमा, अग्रिम, निलंबित खाते और विप्रेषण संबंधी लेन-देन का ऑडिट करना।
- राष्ट्रपति या राज्यपाल के अनुरोध पर किसी प्राधिकरण के खातों का ऑडिट करना, जैसे स्थानीय निकायों के खाते।
CAG द्वारा भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत की जाने वाली ऑडिट रिपोर्ट
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा संविधान के अनुच्छेद 151 के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति को तीन प्रमुख प्रकार की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती हैं।
- विनियोग लेखों पर ऑडिट रिपोर्ट: यह रिपोर्ट दर्शाती है कि विधानमंडल द्वारा स्वीकृत धनराशि को विभिन्न व्यय मदों और अनुदानों के लिए किस प्रकार आवंटित किया गया। यह भी सत्यापित किया जाता है कि धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया या नहीं।
- वित्त लेखों पर ऑडिट रिपोर्ट: यह रिपोर्ट देश की वार्षिक प्राप्तियों और व्यय का विवरण प्रस्तुत करती है।
- सार्वजनिक उपक्रमों पर ऑडिट रिपोर्ट: यह रिपोर्ट विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की वित्तीय स्थिति और उनके व्यय को शामिल करती है।
- रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद राष्ट्रपति इन्हें संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। इसके पश्चात लोक लेखा समिति (PAC) इन रिपोर्टों की जाँच करती है और अपने निष्कर्ष संसद के समक्ष प्रस्तुत करती है।
स्रोत: IE
Previous article
सांसदों और विधायकों के विरुद्ध 4,000 मामले लंबित